रस्किन बॉन्ड का 92वां जन्मदिन: दून-मसूरी की यादों और पहाड़ों की धड़कन में बसते हैं रस्किन
पहाड़ सिर्फ जगह नहीं होते, वे यादों की तरह हमारे भीतर बस जाते हैं। भारतीय अंग्रेजी साहित्य में प्रकृति, पहाड़, बचपन व मानवीय संवेदनाओं को सबसे सहज और आत्मीय भाषा…